गांवो का नाम सुनते ही गाँव से जुडी हर वो चीज आँखों के सामने से गुजर जाती है जो हमने वहां कभी देखी थी वो लहलहाते खेत,....... शाम को वापस आते गाये भैसों के गले में लगे घुघरूओ की आवाज़े,......खेतो से वापस आते किसान ऐसी ही न जाने कितनी ही यादे आँखों में आ जाती है उनमे से ही एक गाँव की वो चौपाले भी है जिन्हें अब के लोग देखने के लिए तरस जाते है
चौपाले ही थी जो लोंगो को एक दुसरे से जोडती थी और लोंगो पर विश्वास जागाती थी......... लोग एक दूसरे के साथ अपने दुःख सुख बांटते थे और अपने काम से जुडी हुई बातो के अलावा मनोरंजन भी करते थे........बिरहा और आल्हा की ताने छेड़ कर दिनभर की थकान दूर करके पहेलिया भी बुछाया किया करते थे........ इन चौपालों से ही लोंग एक गाँव की बात को दूसरे गाँव तक जान पाते थे
अब तो बच्चो को चौपाल का नाम तक नही पता है कि वह होता क्या है............... इस नये इंटरनेट के युग में जब से फेसबुक का आगमन हुआ है तब से इसने लोंगो को एसा जकड़ा है कि लोग साथ रहते हुए भी यही कहते है कि फेसबुक पे बात करेगे................. ये भी लोगो को जानने का एक तरीका ही है लेकिन जो बाते चौपाल में कि जाती थी वह फेसबुक पर नही हो सकती.............जो अपनापन उसमे था वह आज के फेसबुक में नही है और न कभी होगा .

isko pad ke muje mere gaav ki yaad aa gyi yar jha gye hue muje warso bit gye....bt kya kiya jye frn gaw ke bi bacche to aaj kal shahar me hi jake modern banna pasand kr re hai to obiviously cheeje badlengi.....
ReplyDeleteहा ये बात तो सच है की अब गाँव में कहा पहले जैसा माहोल रहा है. अब हमें चौपाल नही देखने को मिलती तो क्या हुआ अब हमें कुछ और देखने को मिलेगा अगर हमें आधुनिक देशो में शामिल होना है तो न्यू टेक्नोलोजी को अपनाना ही पड़ेगा
ReplyDeleteHan ye bilkul sahi hai, desh tarkki to kar raha hai ki aaj koe bhi kisi se kabhi bhi samprak kar sakta hai. Lekin facebook me hum samne wale ke face ko nahi samajh sakte ki oh dukhi hai ya khush. Janhn chaupal ganwo ke logo ke rojana jindgi ki samsyaon ko hal karne ka manch hai.
ReplyDeleteShayad facebook chaupal ki puri tarah se sthan le le par uski kami ko pura nahi kar sakta...
Gud Thought YAAR!!!!!!!!!!!
ReplyDeleteBut iskae liye hame samay chaheeye jo shayad aaj hamare paas nai hai as we all r running in the race which has no end..........
Archna ji mai aaj tak ganw gyi nahi hu to iske baare me jyada kuch nahi kah paugi ba itna hi kahugi ki BHARAT KA AADHA BHAG GANW MW HI BASA HUA HAI OR GANW KI SONDHI MITTI KI KHUSHBU SAHARWASIYO KO APNI OUR KHICH HI LE JATI HAI........BAGO ME FIR JHULE PAD GYE PAK GYI AMIYA MITHIYA....YE LINE GANW KI HI OUR ESAARA KARTI HAIN
ReplyDelete