भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के विषय में यह बिना किसी विवाद के स्वीकार किया जाता है कि वह संयुक्त राज्य-अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के देशो की सभ्यता से बहुत पुरानी है, भारत आजादी के बाद से नई उचाईयो को छूता चला जा रहा है और इतना आगे बढ़ता जा रहा है कि जिसे पकड़ना बहुत मुस्किल है लेकिन इसी देश में एक एसा वर्ग है जो पहले भी वही था और आज भी वही है जिसके लिए विकास जैसे शब्द का कोई मतलब नही रह गया है विकासशील देश कहे जाने वाले भारत में जितनी संख्या अमीरों की है उससे कही ज्यादा गरीब बसते है और उन गरीबो में भी उस वर्ग की गिनती ज्यादा है जो अपनी दो जून की रोटी जुटा पाने मे असमर्थ है,जिसके लिए देश का विकास कोई माइने नही रखता मजदूर, जिसे अपनी रोजमर्रा का कोई पता नही होता फिर भी वह रोज सुबह उठकर उसी भीड़ में आ जाता है जहा वह एक दिन पहले खड़ा था मन में बस एक ही चिंता की आज काम मिल पायेगा की नही,आज घर में चूल्हा जलेगा की नही आये दिन सरकार परियोजनाए बनाती है और उन परियोजनाओ का क्या परिणाम होता है यह किसो को बताने की जरूरत नही है ऐसी ही एक परियोजना इस समय भी चल रही है और उसमे कितने घोटाले हो रहे है यह अखबारों के पन्नो से पता चलता रहता है
मनरेगा जिसका पहला नाम नरेगा था जिसमे मजदूरों की सौ दिन का रोजगार पक्का है रोजगार गारंटी योजना सरकार ने तो सौ दिन का रोजगार पक्का कर दिया लेकिन बाकी दो सौ पैसठ दिन क्या भूखे मरने की गारंटी
aapne in majduro k baare me socha bahut badi baat hai aise hi sb log inke baare me sochne lage to inka haq aise hi koi nhi maar sakta jinke ye haqdaar hai.....
ReplyDeletedukh ki bat to ye hai ki sarkaar sirf bade bade dawe krti hai bt krti kuch nahi...shayad wo ye bhul jati hai agr ye majdur ye kisaan na ho to hme anaaj milna bhi dushwara ho jye...fir bi inko nimn vrg ki nighah se aaka jata hai...its very sad.....
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